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युध्ध की 33 रणनीतियाँ


युध्ध की 33 रणनीतियाँरोबर्ट ग्रीन

( संक्षिप्त संस्करण )

(Hindi Translation of The 33 Strategies of War by Robert Green)

 

इस पुस्तक में बेस्ट्सेलिंग लेखक रोबर्ट ग्रीन ने ऐसी उत्कृष्ट युध्ध रणनीतियों का वर्णन किया है , जो आधुनिक युग में अपना प्रभुत्व स्थापित करने में हमारी मदद कर सकती है ।

  1. भले ही छोटी-मोटी लड़ाईयां हार जाएँ, लेकिन निर्णायक युध्ध जीत ले: विराट रणनीति
  2. अपने शत्रु को जाने : गुप्तचर रणनीति
  3. अंदर से नस्ट करें : आंतरिक मोर्चे की रणनीतियाँ ….

साथ ही ३० अन्य रणनीतियाँ….

यह पुस्तक आपको वे सारे मनोवैज्ञानिक हथियार प्रदान करती है,जो असफलता के चक्र से बाहर आने और हमेशां सबसे आगे रहने के लिए अनिवार्य है

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ઓક્ટોબર 5, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , | Leave a comment

बदले विचार बदलेगा जीवन- डॉ.वेन डायर


बदले विचार बदलेगा जीवन

डॉ.वेन डायर

Change Your Thoughts, Change Your Life पुस्तक का हिन्दी रूपांतरण

सफल जीवन जीने के रहस्य

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२५०० साल पुरानी पुस्तक
‘ ताओ’ के सीक्रेट्स पर
आधारित यह पुस्तक आपके
जीवन में चमत्कार लाएगी ।
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एक इन्टरनेशनल एक्सपर्ट से जाने
सफल जीवन जीने के रहस्य –
ऐसा रहस्य जिससे पाठको का जीवन
सफलता,खुशियों और दौलत से भर जायेगा ।
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खुशी पाने का कोई मार्ग
 नहीं है – खुशी ही मार्ग है ।
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यह एक ऐसी पुस्तक है, जिसे एक कविता की तरह प्रतिदिन पढ़ा जाना चाहिए । यह आपके जीवन को देखने के तरीके को सदैव के लिए बदल देगी और आप प्रकृति के साथ एक नए संसार में जिएंगे। आपको शांति की महानतम भावना महसूस होगी और ‘ ताओ ते चिंग’,यानी ‘महान मार्ग’ प्राप्त होगा, जो संतुलित नैतिक और आध्यात्मिक है ।

ईसा के जन्म से पांच सौ वर्ष पहले लाओत्जू  ने ८१ कविताओं को रचा था । डॉ.वेन डायर ने इन पर ८१ निबंध लिखे है । इनमे बताया गया है कि इतने प्राचीन ज्ञान को आपके संसार में कैसे डाला जाए ।

PUBLISHED IN 25 LANGUAGES !

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જુલાઇ 29, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , , , , , | Leave a comment

सच्चा सोना सो मत जाना


सच्चा सोना सो मत जाना


सरश्री

प्राकृतिक जीवन, मूर्तिपूजा, मान्यताएं, मृत्यु, भाग्य,कर्मकाण्ड को माने या न माने ?

नरक में सोना, स्वर्ग में सोना
‘नरक में सोना, स्वर्ग में सोना’ अगर आप इस शीर्षक से चोंक गए हों तो यह इस बात का प्रमाण है कि आप जाग रहे हैं …….या जागना चाहते है। इस पुस्तक का ऊददेश्य ही आपकी आँखे खोलना है, पूरी तरह जगाना है, सोचने के लिए प्रेरित करना है। चेतना ही पारस पत्थर है, जो इन्सान को जगती है, बनाती है सोना सो मत जाना । हमें केवल नरक से आजाद होना नहीं है बल्कि तथाकथित स्वर्ग से भी स्वतंत्रता पानी है । केवल नरक में सोना मना है, ऐसा नहीं है, स्वर्ग में भी सोना बुरा है ।

सरल और रोचक भाषा में लिखी गई यह पुस्तक आपकी बंद आँखे खोल देगी । यह पुस्तक अज्ञान कि निंद्रा और बेहोशी को दूर करने के लिए लिखी गई है ताकि हम जाग्रत होकर जिएँ। हमें अपना ध्यान मिट्टी ( नकारात्मक सोच ) पर नहीं केवल खरे सोने पर केंद्रित करना चाहिए । यही रणनीति आपको दुनिया का जाग्रत इन्सान (बुद्ध) बना देती है । अब समय आ चूका है कि हम ‘जाग्रति मशाल ‘ जलाएं और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने

 

 

જૂન 9, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , | Leave a comment

सफलता के आध्यात्मिक नियम -दीपक चोपड़ा


सफलता के आध्यात्मिक नियम

दीपक चोपड़ा

Hindi Translation of ‘The Seven Spiritual Laws of Success’

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‘सफलता के आध्यात्मिक नियम’ आपके जीवन को आनंदित कर देगी । इसमें वे रहस्य छिपे है , जो आपके स्वप्नों को साकार करने में मदद करेंगे ।यह उन प्राकृतिक नियमो पर आधारित है,जो सृष्टि का संचालन करते है, और यह इस धारणा को पुष्ट करती है की सफलता केवल कठिन परिश्रम ,सुनिश्चिंत योजनाओं और उच्च महत्वाकांक्षा से नहीं मिलती ।

सुप्रसिध्ध मोटिवेशन गुरु तथा प्रख्यात लेखक दीपक चोपड़ा ने इस पुस्तक में सफलता प्राप्त करने के लिए जीवन-दर्शन बदलने की वकालत की है । उनका मानना है की जब हम वास्तविक रूप में प्रकृति से तादात्म्य स्थापित कर ले और उसके नियम के अनुसार जीवन जीना शुरू कर दें तो सुख-सौभाग्य, सुस्वास्थ्य, सुमधुर संबंध और भौतिक सुख सहजता से प्राप्त होने लगते है ।

जीवन में आध्यात्मिक उत्थान और स्वयं की पहचान करानेवाली लोकप्रिय एवं व्याहारिक कृति ।

 

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જૂન 3, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , | Leave a comment

टीम खिलाडी के 17 अनिवार्य गुण -ऐसे व्यक्ति बने, जिसे हर टीम चाहे


टीम खिलाडी के 17 अनिवार्य गुण

जॉन सी.मैक्सवेल


ऐसे व्यक्ति बने, जिसे हर टीम चाहे

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लीडरशिप विशेषज्ञ जॉन सी.मैक्सवेल की इस पुस्तक से उन व्यक्तिगत गुणों का स्पष्ट विशलेषण हैं, जो

टीम का प्रभावी खिलाडी बनने के लिए जरुरी है । मैक्सवेल के विस्तृत विवरण और उदहारण समजने और

अमल करने में आसान है,चाहे घर हो,ऑफिस हो या फिर कोई अन्य संगठन हो ।

टीम खिलाडी के 17 अनिवार्य गुण में मैक्सवेल उन टीम खिलाडियों की सफलताओ की रुपरेखा बताते ,जो

ऐसे थे :

  • बुलंद इरादों वाले – जिनका हर कम दीर्धकालीन लक्ष्य को पाने के लिए महत्वपूर्ण होता है ।
  • संबंध जोड़ने वाले – जिनका ध्यान दुसरो पर केन्द्रित होता है ।
  • नि:स्वार्थ –जो टीम की खातिर अधीनस्थ की भूमिका निभाने के इच्छुक होते है ।
  • लगनशील – मुश्किलों के बीच भी मेहनती और आशावादी होते है ।

मैक्सवेल बताते है कि ये 17 गुण टीम और इसकी सफलता को किस तरह प्रभावित करते है । यह पुस्तक

अच्छा महसूस कराने वाले वाक्यों और अमूर्त चिंतन का दस्तावेज नहीं है , बल्कि इसमें ठोस कदम दिए

गए है, जिन पर चलकर हर टीम खिलाडी खुद को बेहतर बना सकता है ।

મે 23, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , | Leave a comment

जीवन के नियम -रिचर्ड टेंपलर


जीवन के नियम
रिचर्ड टेंपलर

Hindi translation of ‘The Rules of Life’

बेहतर, सुखमय और सफल जीवन की निजी मार्गदर्शिका
कुछ लोगों का जीवन बेहतरीन नजर आता है । ऐसा लगता है जैसे वे बिना कोशिश किये आगे बढ़ रहे है और ऊपर पहुँच रहे है । वे जानते है कि किस स्थिति में क्या करना और कहना चाहिए । हर व्यक्ति उन्हें पसंद करता है – उनके साथ काम करना और जीना आनंददायक होता है । वे ज्यादातर वकत खुश रहते है और जिंदगी के थपेड़ो का सामना करने का तरीका जानते है कि क्या महत्वपूर्ण है ( और महत्वहीन चीजो से निबटने का तरीका भी ) क्या कोई ऐसी चीज है, जो वे जानते है, लेकिन हम नहीं जानते ? क्या कोई ऐसी चीज है, जिसे हम सभी सिख सकते है ? जवाब है हाँ वे जीवन के नियम जानते है
जीवन के नियम ऐसे मार्गदर्शक सिध्धांत है, जिनकी मदद से आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते है, विपत्तियों का ज्यादा अच्छी तरह सामना कर सकते है और कुल मिलकर ज्यादा खुश ,चिंतामुक्त तथा संतुष्ट बन सकते है । अंतर आपको और आपके आस-पास के हर व्यक्ति को साफ नजर आएगा
जीवन के नियम ढेर सारा पैसा कमाने और करियर में बेहद सफल बनने के बारे में नहीं हैं ( उसके लिए तो आपको द रूल्स ऑफ़ वर्क ढनी होंगी ) यह तो बस इस बारे में है कि आप भीतर से कैसा महसूस करते है ? आप अपने आस-पास के लोगों को किस तरह प्रभावित करते है ? आप किस तरह के दोस्त, पार्टनर और अभिभावक है ? आप दुनिया पर किस तरह का असर डालते है और कैसी छाप छोड़ते है
यह आपका जीवन है । इसे बेहतरीन बनाएँ

મે 18, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , | Leave a comment

खाइए और वजन घटाइए -ॠजूता दिवेकर


खाइए और वजन घटाइए

ॠजूता दिवेकर

करीना ने एक आदर्श सुडौल देह पाई, जानना चाहते हैं कैसे ?
ॠजूता दिवेकर से पूछिए । वे बतायेंगी ,ऐसे ।
जीरो फिगर के लिए मशहूर एक्ट्रेस करीना कपूर और बिजनेसमैन अनिल अंबानी जैसे लोगों को फिटनेस सलाह देती हैं ऋजुता। उनकी किताब “डोंट लूज योर माइंड, लूज योर वेट” की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं। इसका हिंदी संस्करण “खाइए और वजन घटाइए” के नाम से प्रकाशित हुआ है। जल्द ही वे अपनी दूसरी किताब “वुमन एंड वेट लॉस तमाशा” लेकर आ रही हैं।

लोगों में खान-पान को लेकर बनी धारणाओं को तोड़ रही हैं देश की युवा फिटनेस गुरू ऋजुता दिवेकर।
दिल की सुनें
हर इंडियन जानता है कि कब क्या खाना है, अगर हम अपने भोजन को कैलोरी में बांटने लगेंगे, तो फंस जाएंगे और खान-पान के नजरिए से गलत दिशा में चले जाएंगे।
पूरी-सब्जी, पोहा, सूजी का हलवा, आलू-परांठा और इडली-डोसा जैसी चीजों से भी आपका सौंदर्य निखर सकता है।
कोक न पिएं। पीना है, तो दूध पिओ।
हैल्दी ड्रिंक्स में शुगर ज्यादा होती है, इनसे बचें।
जब आप घर पर बनी चीजों को मजे-मस्ती से खाते हैं, तो आपके शरीर को ज्यादा पोषण मिलता है।
भोजन में दूसरों की देखादेखी से बचें। खाने में मन की आवाज सुनें। डायटिंग का मतलब है- सही समय पर सही चीज खाना, न कि कुछ खाने से खुद को रोकना।

छोटी-छोटी मात्रा
हर दो घंटे में शरीर को भोजन की जरूरत पड़ती है। इसलिए जितना काम करो, उतना खाओ।
पूरे दिन के आखिरी भोजन और सोने में चार घंटे का अंतर होना चाहिए।
हमें दिन भर छोटी-छोटी मात्रा में खाते रहना चाहिए।
लगातार काम के चक्कर में खाने के बारे में कभी न भूले
ये बात सच है!
भूख मारोगे, तो मोटापा बढ़ेगा। जो कुछ न कुछ खाता रहेगा, पतला रहेगा।
अक्सर लोग वेट कम करने को शरीर का वजन कम करना मानते हैं, जबकि हमें फैट कम करना चाहिए।
जब जरूरत है, तब आप नहीं खाते, तो भी फैट बढ़ेगा और जब जरूरत नहीं है, तब खाया, तब भी फैट बढ़ने लगेगा।

મે 16, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , | Leave a comment

सफल सोच का सफल जादू


सफल सोच का सफल जादू

डेविड जे. श्वार्टज़

‘The Magic Of Thinking Success’ (Hindi Translation)

इंसान की सबसे मूल्यवान अनुभूति कौन सी है ? चारों तरफ़ व्याप्त जीवन के विहंगम दृश्य को देखने की क्षमता ? गीत और भाषा की ध्वनियाँ सुनने की शक्ति ? भौतिक संसार का आनंद अनुभव करने की क्षमता ? या फिर शायद समृद्घ प्रकृति की मधुरता और सौंदर्य का स्वाद व गंध लेने की योग्यता ?

डॉ. डेविड श्वार्ट्रज़ का विश्वास है कि हमारी सबसे अधिक मूल्यवान अनुभूति है ‘‘मस्तिष्कदृष्टि’’ (mindsight)–वह क्षमता जिसके द्वारा हम अपने जीवन को सबसे संतोषजनक रूप में देख सकते हैं। परन्तु मस्तिष्कदृष्टि जीवन को सर्वश्रेष्ठ रूप में देखने की सिर्फ़ मानसिक दृष्टि ही नहीं है; यह इससे भी अधिक है। यह एक नज़रिया है और कार्ययोजना भी; यह एक सपना है और उस सपने को हक़ीक़त में बदलने की योग्यता भी।

सफल सोच का सफल जादू व्यावहारिक सुझाव देती है और भावनात्मक संबल भी देती है। इसके सहारे हम अपने अंदर छुपी शक्तिशाली ‘‘छठी इंद्रिय’’ को खोज सकते हैं और उसका प्रभावी प्रयोग कर सकते हैं। हममें से बहुत कम लोग जानते हैं कि हम क्या चाहते हैं, उसे पाने की योजना बनाने की बात तो छोड़ ही दें। फिर भी, यह तय है कि सही दिशा में चलने पर हमारा जीवन जितना रोमांचक, संतुष्टिदायक और सफल हो सकता है, उतना दिशाहीन जीवन नहीं हो सकता। यह पुस्तक हमें बताती है कि हम ख़ुद को ऐसी राह पर कैसे ले जायें, जिससे हमें सुख और संतुष्टि मिले। साथ ही, यह बहुमूल्य उपाय भी बताती है, जिससे हमें इस राह पर बने रहने में मदद मिल सके। इसमें जीवन के हर क़दम पर सफलता हासिल करने का मार्गदर्शन दिया गया है।

डॉ. श्वार्टज़ कहते हैं कि व्यक्तिगत सफलता व्यक्तिगत सुख की पर्यायवाची है। आप अपने बारे में, अपने काम के बारे में, अपने रिश्तों के बारे में और दुनिया के बारे में जैसा महसूस करते हैं, उसी अनुपात में आपकी व्यक्तिगत सफलता अधिक या कम होती है।

लेखक ने विस्तार से बताया है कि सच्चे सफल लोग वे होते हैं, जो हर नये दिन का स्वागत उत्साह, आत्मविश्वास और आशा के साथ करते हैं। उन्हें ख़ुद पर भरोसा होता है और उस जीवन पर भी, जिसे जीने का विकल्प उन्होंने चुना है। वे जानते हैं कि जीवन में सब कुछ पाने के लिए उन्हें अपना सब कुछ देना पड़ेगा। वे ‘‘प्रेम करने से प्रेम करते हैं और अपने काम से प्रेम करते हैं।’’ वे लोग दूसरों को प्रेरित करने में कुशल होते हैं और दूसरों की उपलब्धियों पर ख़ुश होते हैं। वे दूसरों का ध्यान रखते हैं, उनके साथ अच्छा व्यवहार करते हैं और बदले में उनके साथ भी अच्छा व्यवहार किया जाता है। मस्तिष्कदृष्टि द्वारा वे जानते हैं, कि मेहनत, चुनौती और त्याग जीवन के हिस्से हैं। वे हर दिन दुख को व्यक्तिगत विकास के अवसर में बदल लेते हैं। सफल व्यक्ति डर का सामना करके उसे जीत लेते हैं और दर्द को झेलकर उसे हरा देते हैं। उनमें अपने दैनिक जीवन में सुख पैदा करने की क्षमता होती है, जिससे उनके आसपास रहने वाले सौभाग्यशाली लोग भी सुखी हो जाते हैं। उनकी निश्छल मुस्कान आंतरिक शक्ति और जीवन की सकारात्मक शैली का प्रमाण होती है।

क्या आप खुद को उन लोगों में से एक मानते हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत सफलता हासिल कर ली है ? क्या आप उतने सुखी हैं, जितने आप होना चाहते हैं ? क्या आप अपने सपनों का जीवन जी रहे हैं या फिर आप उतने से ही संतुष्ट होने की कोशिश कर रहे हैं, जो आपके हिसाब से आपको मिल सकता है ? क्या आपको हर दिन सुंदर व संतुष्टिदायक अनुभवों से भरे अद्भुत अवसर की तरह दिखता है ? अगर ऐसा नहीं है, तो डॉ. श्वार्टज़ के पास आपके लिये एक महत्वपूर्ण संदेश है : किसी को भी संपूर्ण, समृद्ध और पुरस्कार से भरे जीवन से कम पर समझौता नहीं करना चाहिये। वे ऐसे अनिवार्य नज़रिये और तरीक़े बताते हैं, जिनके द्वारा ऐसा किया जा सकता है। साथ ही वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि व्यक्तिगत रूप से सफल होने के लिये कौन से कदम उठाना ज़रूरी है।

आप अपनी मनचाही ज़िंदगी जीने में सफल हो पायेंगे या नहीं, यह अब पूरी तरह आप पर निर्भर है। इस पुस्तक के पन्नों में जो ज्ञान दिया गया है, उसका इस्तेमाल करके आप अपने सपनों को हकी़क़त में बदल सकते हैं।

એપ્રિલ 28, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , | Leave a comment

चाणक्य: एक संक्षिप्त परिचय


चाणक्य नीति –

आचार्य विष्णुगुप्त

Edi:अश्विनी पाराशर

आचार्य विष्णुगुप्त (चाणक्य) द्वारा प्रणीत चाणक्य नीति का मुख्य विषय मानव मात्र को जीवन के प्रत्येक पहलू की व्यावहारिक शिक्षा देना है। इसमें मुख्य रूप से धर्म, संस्कृति, न्याय, शांति, सुशिक्षा एवं सर्वतोन्मुखी मानव जीवन की प्रगति की झाँकियां प्रस्तुत की गई हैं। आचार्य चाणक्य के नीतिपरक इस महत्वपूर्ण ग्रंथ में जीवन-सिद्धान्त और जीवन-व्यवहार तथा आदर्श और यथार्थ का बड़ा सुन्दर समन्वय देखने को मिलता है। जीवन की रीति-नीति सम्बन्धी बातों का जैसा अदुभुत और व्यावहारिक चित्रण यहाँ मिलता है अन्यत्र दुर्लभ है। इसीलिए यह ग्रन्थ पूरे विश्व में समादृत है।
प्रस्तुत हैं कुछ उद्धहरण-
लक्ष्मी, प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चलायमान है।
केवल धर्म ही स्थिर है।
एक गुणवान पुत्र सैंकड़ों मूर्ख पुत्रों से अच्छा है।
एक ही चन्द्रमा अन्धकार को नष्ट कर देता है, किन्तु हजारों तारे ऐसा नहीं कर सकते।
माँ से बढ़कर कोई देवता नहीं है।
पिता का सबसे बड़ा कर्तव्य है कि पुत्र को अच्छी से अच्छी शिक्षा दे।
दुष्ट के सारे शरीर में विष होता है।
दुष्टों तथा काँटों को या तो जूतों से कुचल दो या उनके रास्ते से ही हट जाओ।
जिसके पास धन है, उसके अनेक मित्र, भाई बन्धु और रिश्तेदार होते हैं।
अन्न, जल तथा सुभाषित ही पृथ्वी के तीन रत्न हैं।
मूर्खों ने व्यर्थ ही पत्थर के टुकड़े को रत्न का नाम दिया है।
सोने में सुगन्ध, गन्ने में फल और चन्दन में फूल नहीं होते।
विद्वान धनी नहीं होता और राजा दीर्घजीवी नहीं होते।
समान स्तर वालों से मित्रता शोभा देती है।
कोयल का रूप उसका स्वर है।
पतिव्रता होना ही स्त्रियों की सुन्दरता है।

चाणक्य: एक संक्षिप्त परिचय

प्राचीन भारतीय संस्कृत वांगमय के इतिहास में आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य अपने गुणों से मंडित, राजनीति विशारद, आचार-विचार के मर्मज्ञ, कूटनीति में सिद्धहस्त एवं प्रवीण रूप में ख्यातनाम हैं। उन्होंने नन्द वंश को समूल नष्ट कर उसके स्थान पर अपने सुयोग्य एवं मेधावी वीर शिष्य चन्द्रगुप्त मौर्य को शासक पद पर सिंहासनारूढ़ करके अपनी जिस विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया उससे समस्त विश्व परिचित है। मौर्यवंश की स्थापना आचार्य चाणक्य की एक महती उपलब्धि है। यह वह समय था जब मौर्यकाल के प्रथम सिंहासनारूढ़ चंद्रगुप्त मौर्य शासक थे। उस समय चाणक्य राजनीति गुरू थे। आज भी कुशल राजनीति विशारद को चाणक्य की संज्ञा दी जाती है। चाणक्य की संज्ञा दी जाती है। चाणक्य ने संगठित, संपूर्ण आर्यावर्त का स्वप्न देखा था तदनुरूप उन्होंने सफल प्रयास किया था। चाणक्य अनोखे, अद्भुत निराले, ऐसे कुशल राजनीतिज्ञ थे कि उन्होंने मगध देश के नंद राजाओं की राजसत्ता का सर्वनाश करके ‘मौर्य राज्य’ की स्थापना की थी। चाणक्य का जन्म का नाम विष्णुगुप्त था और चणक नामक आचार्य के पुत्र होने के कारण इनका नाम चाणक्य पड़ा। कुछ लोगों का मत है कि अत्यंत कुशाग्र बुद्धि होने के कारण वह ‘चाणक्य’ कहलाए। कुटिल राजनीति विशारद होने के कारण इन्हें कौटिल्य नाम से संबोधित किया गया। पर संभवत: यह इनके गोत्र का नाम रहा हो किन्तु अनेक विद्वानों के मतानुसार कुटिल नीति के निर्माता होने के कारण इनका नाम कौटिल्य पड़ा। म.म. गणपति शास्त्री ने ‘कुटिल’ गोत्रोत्पन्न पुमान् कौटिल्य : इस व्युत्पत्ति के अनुसार इन्हें कौटिल्य गोत्र का मानने पर बल दिया है। आप चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री, गुरु, हितैषी तथा राज्य के संस्थापक थे। चंद्रगुप्त मौर्य को राजा पद पर प्रतिष्ठित करने का कार्य इन्हीं के बुद्धि-कौशल का परिणाम था।

चाणक्य के जन्म-स्थान के बारे में इतिहास मौन है। परंतु उनकी शिक्षा-दीक्षा तक्षशिला विश्वविद्यालय में हुई थी। वह स्वभाव से अभिमानी, चारित्रिक एवं विषय-दोषों से रहित स्वरूप से कुरूप, बुद्धि से तीक्ष्ण, इरादे पक्के, प्रतिभा धनी, युगद्रष्टा एवं युगस्रष्टा। जन्म से पाटलिपुत्र के रहनेवाले चाणक्य के बुद्धिबल का पूरा विकास तक्षशिला के आचार्य के संरक्षण में हुआ। अपने प्रौढ़ ज्ञान के प्रभाव से वहाँ के विद्वानों को प्रसन्न कर चाणक्य राजनीति का प्राध्यापक बना। देश की दुर्व्यवस्था को देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठा। इसके लिए उसने विस्तृत कार्यक्रम बनाकर देश को एक सूत्र में बाँधने का संकल्प किया और इसमें उसे सफलता भी मिली।

चाणक्य के जीवन का उद्देश्य केवल ‘बुद्धिर्यस्य बलं तस्य’ ही था। इसीलिए चाणक्य को अपनी बुद्धि एवं पुरुषार्थ पर पूरा भरोसा था। वह ‘दैवाधीन जगत्सर्वं’ सिद्धान्त को भ्रम मानता था।

चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य का समय एक ही है-325 ई.पू. मौर्य सम्राट् चंद्रगुप्त का समय था, यही समय चाणक्य का भी है। चाणक्य का निवास स्थान शहर से बाहर पर्णकुटी थी जिसे देखकर चीन के ऐतिहासिक-यात्री फाह्यान ने कहा था-‘‘इतने विशाल देश का प्रधानमंत्री ऐसी कुटिया में रहता है !’’ तब उत्तर था चाणक्य का-‘‘जहाँ का प्रधानमंत्री साधारण कुटिया में रहता है वहाँ के निवासी भव्य भवनों में निवास किया करते हैं और जिस देश का प्रधानमंत्री राज प्रासादों में रहता है वहां की सामान्य जनता झोपड़ियों में रहती है।’’

चाणक्य की झोंपड़ी में एक ओर गोबर के उपलों को तोड़ने के लिए एक पत्थर पड़ा रहता था, दूसरी ओर शिष्यों द्वारा लायी हुई कुशा का ढेर लगा रहता था। छत पर समिधाएँ सूखने के लिए डाली हुई थीं, जिसके भार से छत नीचे झुक गयी थी। ऐसी जीर्ण-शीर्ण कुटिया चाणक्य की निवास-स्थली थी।

आह ! वह देश महान् क्यों न होगा जिसका प्रधानमंत्री इतना ईमानदार, जागरूक, चरित्र का धनी व कर्तव्यपरायण हो। इन भावों को देखकर लोग दंग रह जाते हैं। हमारे मन रूपी वीणा के समस्त संवेदनशील तार इस दृश्य को देखकर एक साथ झंकृत हो उठते हैं। उन तारों से ऐसी करुणा की रागिनी फूटती है कि चाणक्य की संपूर्ण राजनीति की उच्छृंखलता उसी में धीरे-धीरे विलीन हो जाती है। उसके ज्योतिष्चक्र के सामने आँखें मींचकर चाणक्य को त्यागी एवं तपस्वी के रूप में देखकर सिर झुक जाता है।

2500 वर्ष ई.पूर्व चणक के पुत्र विष्णुगुप्त ने भारतीय राजनयिकों को राजनीति की शिक्षा देने के लिए अर्थशास्त्र, लघु चाणक्य, वृद्ध चाणक्य, चाणक्य-नीति शास्त्र आदि ग्रंथों के साथ व्याख्यायमान सूत्रों का निर्माण किया था।

संस्कृत-साहित्य में नीतिपरक ग्रन्थों की कोटि में चाणक्य नीति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें सूत्रात्मक शैली में जीवन को सुखमय एवं सफल-सम्पन्न बनाने के लिए उपयोगी अनेक विषयों पर प्रकाश डाला गया है। चाणक्य के अनुसार आदर्श राज्य संस्था वही है जिसकी योजनाएं प्रजा को उसके भूमि, धन-धान्यादि पाते रहने के मूलाधिकार से वंचित कर देनेवाली न हों, उसे लम्बी-चौड़ी योजनाओं के नाम से कर-भार से आक्रांत न कर डालें। राष्ट्रोद्धारक योजनाएं राजकीय व्ययों में से बचत करके ही चलाई जानी चाहिए। राजा का ग्राह्य भाग देकर बचे प्रजा के टुकड़ों के भरोसे पर लंबी-चौड़ी योजना छेड़ बैठना प्रजा का उत्पीड़न है।

चाणक्य का साहित्य समाज में शांति, न्याय, सुशिक्षा, सर्वतोन्मुखी प्रगति सिखानेवाला ज्ञान-भंडार है। राजनीतिक शिक्षा का यह दायित्व है कि वह मानव समाज को राज्य संस्थापन, संचालन, राष्ट्र-संरक्षण-तीनों काम सिखाए।

दुर्भाग्य है भारत का कि चाणक्य के ज्ञान की उपेक्षा करके देशी-विदेशी शत्रुओं को आक्रमण करने का निमंत्रण देकर अपने को शत्रुओं का निरूपाय आखेट बनानेवाली आसुरी शिक्षा को अपना लिया है। नैतिक-शिक्षा, धर्म-शिक्षा का लोप हो गया है। चरित्र-निर्माण को बहिष्कृत कर दिया है। मात्र लिपिक (क्लर्क) पैदा करनेवाली, सिद्धांतहीन, पेट-पालन की शिक्षा रह गई है। समाज धीरे-धीरे आसुरी रूप लेता जा रहा है। अर्थ-दास सम्मान या आत्मगौरव की उपेक्षा करता है। स्वाभिमान का जनाजा निकाला जा रहा है।

आज के स्वार्थपूरित, अज्ञानांधकार में डूबे शुद्ध स्वार्थी राजनीतिक परिदृश्य में मात्र चाणक्य का ज्ञानामृत ही भारत का पथ-प्रदर्शक बनने की क्षमता रखता है। वही हमें राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक मुक्ति-मार्ग दिखा सकता है। आज की सदोष राष्ट्रीय परिस्थिति इस वर्तमान कुशिक्षा के कारण है। राष्ट्रीय भावना, राष्ट्रहित तथा मनु के आदर्श आज लोप हो चुके हैं। अहंकारी विद्या का ही बोलबाला है। सांस्कृतिक स्वरूप ध्वंस हो चुका है। निष्काम सेवा-भाव का दिवाला निकल गया है। प्रभुता लोभी नेतापन की मदिरा ने बौरा दिया है। चाणक्य की राजनीतिक चिंता-धारा को समाविष्ट करके ही भारत का उद्धार हो सकता है। इसके अध्ययन-पारायण से राजनीति की समझ के विकास के साथ-साथ व्यक्ति में सच्चरित्र सदाचारी, व्यवहार-कुशल एवं धर्मनिष्ठ और कर्मशील मानव के समुचित विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसीलिए यह नीति-पाठ आज भी प्रांसगिक है।

એપ્રિલ 19, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , | Leave a comment

अधिकतम सफलता -ब्रायन ट्रेसी


अधिकतम सफलता


ब्रायन ट्रेसी

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Hindi Translation of Maximum Achievement By Brian Tracy

सफलता पाने की रणनीतियाँ और योग्यताएँ , जो आपकी छिपी हुई शक्तियाँ के दरवाजे खोल देगी !

“यह महान पुस्तक आपके लिए सफलता और ख़ुशी के दरवाजे खोल देगी । आपको तो बस इसके सशक्त सिंद्धांतो पर अमल करना है ।”

– ओग मैन्डीनो

” क्या आप किसी ऐसी व्यक्तिगत तलाश कर रहे है, जो आपको सफलता के सिखर पर पहुंचा दे ? आपकी तलाश ख़त्म हो गई है ।

ब्रायन ट्रेसी की अधिकतम सफलता (मैक्सिमम अचीवमेंट ) हमारे भीतर छिपे रहस्यों से परिचित कराती है । यह मुद्दे की तह और दिल की गहराई तक जाती है ।”

– हार्वे मेके

ब्रायन ट्रेसी सफलता और व्यक्तिगत उपलब्धि के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञो में से एक है । वे हर साल निजी सेमिनारो और सार्वजनिक संभाषण द्वारा एक लाख से अधिक लोगों को संबोधित करते है । अधिकतम सफलता में वे आपको ऐसा सशक्त , आजमाया हुआ तरीका बताते है,जो उनके चौबीस साल के शोध और व्यावहारिक अध्ययन पर आधारित है । इससे आपको अपने जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम मिल सकते है, और वह भी तत्काल ।

आप ऐसे विचार, अवधारणाएँ और विधियाँ सिखेगे , जिनका प्रयोग हर क्षेत्र के सफल व्यक्ति हर जगह करते है । आप सीखेंगे कि महानता कि मंजिल पर पहुँचने के लिए अपनी व्यक्तिगत क्षमता का द्वार कैसे खोला जाय । आप तत्काल ज्यादा सकारात्मक , प्रभावी और एकाग्रचित्त बन जायेंगे । दस लाख से ज्यादा लोग उनके सेमिनार कार्यक्रम में भाग लेने के बाद ज्यादातर प्रतिभागियों कि आमदनी उल्लेखनीय रूप से बढ़ गई है और उनके जीवन के हर क्षेत्र में सुधर हुआ है ।

इस पुस्तक में सफलता और उपलब्धि पाने के लिए कदम दर कदम ब्लूप्रिंट दिया गया है, जिससे आप धीरे-धीरे सफलता कि इतनी ऊँची मंजिल पर पहुँच जायेंगे , जिसकी आपने कल्पना भी नहीं कि होंगी । यह पुस्तक आपके आत्मसन्मान को बाधा सकती है, आपके व्यक्तिगत प्रदर्शन को सुधार सकती है और व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक जीवन के हर पहलू पर पूरा नियंत्रण प्रदान कर सकती है ।

એપ્રિલ 17, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , , , | Leave a comment