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सच्चा सोना सो मत जाना


सच्चा सोना सो मत जाना


सरश्री

प्राकृतिक जीवन, मूर्तिपूजा, मान्यताएं, मृत्यु, भाग्य,कर्मकाण्ड को माने या न माने ?

नरक में सोना, स्वर्ग में सोना
‘नरक में सोना, स्वर्ग में सोना’ अगर आप इस शीर्षक से चोंक गए हों तो यह इस बात का प्रमाण है कि आप जाग रहे हैं …….या जागना चाहते है। इस पुस्तक का ऊददेश्य ही आपकी आँखे खोलना है, पूरी तरह जगाना है, सोचने के लिए प्रेरित करना है। चेतना ही पारस पत्थर है, जो इन्सान को जगती है, बनाती है सोना सो मत जाना । हमें केवल नरक से आजाद होना नहीं है बल्कि तथाकथित स्वर्ग से भी स्वतंत्रता पानी है । केवल नरक में सोना मना है, ऐसा नहीं है, स्वर्ग में भी सोना बुरा है ।

सरल और रोचक भाषा में लिखी गई यह पुस्तक आपकी बंद आँखे खोल देगी । यह पुस्तक अज्ञान कि निंद्रा और बेहोशी को दूर करने के लिए लिखी गई है ताकि हम जाग्रत होकर जिएँ। हमें अपना ध्यान मिट्टी ( नकारात्मक सोच ) पर नहीं केवल खरे सोने पर केंद्रित करना चाहिए । यही रणनीति आपको दुनिया का जाग्रत इन्सान (बुद्ध) बना देती है । अब समय आ चूका है कि हम ‘जाग्रति मशाल ‘ जलाएं और अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने

 

 

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જૂન 9, 2011 Posted by | हिंदी पुस्तकें | , | Leave a comment